GST Rate 2026 को लेकर साल की शुरुआत से ही आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। सोशल मीडिया पोस्ट, व्हाट्सएप फॉरवर्ड, यूट्यूब वीडियो और कई न्यूज़ पोर्टल्स पर यह दावा किया जा रहा है कि “आज से नई जीएसटी दरें लागू हो गई हैं” और इसी वजह से कई जरूरी चीजों के दाम घट गए हैं, जबकि कुछ सामान अचानक महंगे हो गए हैं। बढ़ती महंगाई के दौर में टैक्स से जुड़ी कोई भी खबर सीधे घरेलू बजट को प्रभावित करती है, इसलिए लोगों का चिंतित और उत्सुक होना बिल्कुल स्वाभाविक है।
लेकिन अगर आप भी यह सोच रहे हैं कि जनवरी 2026 में अचानक कोई नई GST दरें लागू हो गई हैं, तो आपको पूरी जानकारी जानना जरूरी है। सच्चाई यह है कि 2026 की शुरुआत में कोई नई GST दरें लागू नहीं की गई हैं। जो बदलाव बाजार में दिखाई दे रहे हैं, वे अक्टूबर 2025 में जीएसटी परिषद द्वारा मंजूर किए गए GST 2.0 सुधारों का ही असर हैं। इन्हीं सुधारों के आधार पर 2026 में टैक्स सिस्टम काम कर रहा है। आइए आसान हिंदी में समझते हैं कि GST Rate 2026 की वास्तविक स्थिति क्या है, कौन-सा सामान सस्ता हुआ है और कौन-सी चीजें अभी भी महंगी बनी हुई हैं।
2026 में GST दरों की मौजूदा हकीकत
GST Rate 2026 को सही तरीके से समझने के लिए हमें अक्टूबर 2025 में हुए GST 2.0 सुधारों पर नजर डालनी होगी। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य टैक्स ढांचे को सरल, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाना था। पहले जहां 0%, 5%, 12%, 18% और 28% जैसी कई दरें थीं, वहीं सुधारों के बाद सरकार ने मुख्य रूप से 5% और 18% स्लैब पर फोकस किया।
2026 में भी यही ढांचा लागू है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि बाकी स्लैब पूरी तरह खत्म हो गए हैं। कुछ खास वस्तुओं और सेवाओं के लिए 0%, 0.25%, 3%, 28% और कुछ मामलों में 40% तक की दरें अब भी लागू हैं। जरूरी और रोजमर्रा की चीजों को कम टैक्स या टैक्स से पूरी तरह मुक्त रखा गया है, जबकि लग्ज़री और नुकसानदायक वस्तुओं पर ऊंचा टैक्स लगाया गया है। सरकार का मकसद साफ है—आम आदमी को राहत और गैर-जरूरी चीजों से ज्यादा राजस्व।
GST Rate 2026 के प्रमुख स्लैब और उनका दायरा
0% जीएसटी स्लैब: सबसे बड़ी राहत
GST Rate 2026 में 0% स्लैब आम जनता के लिए सबसे राहत देने वाला है। इस श्रेणी में चावल, गेहूं, दालें, आटा, ताजे फल और सब्जियां, दूध, अंडे, बिना पैकेज वाले खाद्य पदार्थ शामिल हैं। इसके अलावा सरकारी स्कूलों की शिक्षा सेवाएं और अस्पतालों की मूल स्वास्थ्य सेवाएं भी जीएसटी से पूरी तरह मुक्त हैं। इन चीजों पर टैक्स न लगने से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों का रोजमर्रा का खर्च काफी हद तक नियंत्रित रहता है।
5% जीएसटी स्लैब: रोजमर्रा की जरूरतें
5% जीएसटी स्लैब में वे वस्तुएं आती हैं जिनका इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है। पैकेज्ड अनाज, बिस्किट, चाय, चीनी, खाद्य तेलों की कुछ श्रेणियां, घरेलू एलपीजी सिलेंडर और दैनिक उपयोग की कई चीजें इसी स्लैब में रखी गई हैं। GST 2.0 सुधारों के बाद इस स्लैब का दायरा और बढ़ा है, जिससे आम लोगों को सीधा फायदा मिला है।
18% जीएसटी स्लैब: सेवाएं और उपभोक्ता वस्तुएं
GST Rate 2026 में 18% स्लैब सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला स्लैब है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, फर्नीचर, होटल सेवाएं, ट्रैवल, बीमा, आईटी सेवाएं और प्रोफेशनल सर्विसेज शामिल हैं। यह स्लैब सरकार के राजस्व का बड़ा हिस्सा देता है।
28% और उससे ऊपर: लग्ज़री और पाप वस्तुएं
28% या उससे अधिक जीएसटी स्लैब में लग्ज़री और नुकसानदायक वस्तुएं रखी गई हैं। इसमें महंगी गाड़ियां, बड़ी इंजन क्षमता वाली बाइक, तम्बाकू उत्पाद, पान मसाला और कुछ लग्ज़री आइटम शामिल हैं। कुछ मामलों में इन पर अतिरिक्त सेस भी लगाया जाता है, जिससे टैक्स का बोझ और बढ़ जाता है।
GST Rate 2026 में कौन-सी चीजें सस्ती महसूस हो रही हैं
GST 2.0 सुधारों के बाद 2026 में कई ऐसी चीजें हैं जिनकी कीमतें पहले की तुलना में कम या स्थिर महसूस हो रही हैं। साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, डिटर्जेंट जैसी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुएं पहले 18% स्लैब में थीं, लेकिन अब इन्हें 5% स्लैब में शामिल कर दिया गया है। इसका असर यह हुआ है कि हर परिवार के मासिक खर्च में थोड़ी-बहुत राहत जरूर मिली है।
मिड-रेंज कपड़े और जूते, जिन पर पहले 12% या 18% टैक्स लगता था, अब ज्यादातर मामलों में 5% जीएसटी के दायरे में आ गए हैं। पैकेज्ड फूड आइटम जैसे बिस्किट, चाय और चीनी भी कम टैक्स स्लैब में होने के कारण अपेक्षाकृत सस्ते हैं। इसके अलावा छोटी और मध्यम कारें तथा 350 सीसी तक की बाइक पर टैक्स बोझ कम होने से ऑटो सेक्टर में भी कीमतें कुछ नरम पड़ी हैं।
GST Rate 2026 में कौन-सी चीजें अब भी महंगी हैं
जहां जरूरी सामान पर टैक्स में राहत दी गई है, वहीं कुछ चीजें 2026 में भी महंगी बनी हुई हैं। सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पादों पर 28% जीएसटी के साथ अतिरिक्त सेस और शुल्क लगता है। सरकार इन्हें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानती है, इसलिए जानबूझकर ऊंचे टैक्स के दायरे में रखा गया है।
शराब और पान मसाला जीएसटी के सामान्य ढांचे से बाहर या उच्च टैक्स सिस्टम में आते हैं, इसलिए इनके दाम कम नहीं हुए हैं। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर पर टैक्स बढ़ने से होटल, ढाबा और छोटे व्यवसायों की लागत बढ़ी है, जिसका असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी पड़ता है। इसके अलावा महंगी हाउसिंग सोसायटियों के मेंटेनेंस चार्ज पर जीएसटी लागू होने से बड़े फ्लैट मालिकों का मासिक खर्च भी बढ़ा है।
2026 में GST को लेकर आगे क्या हो सकता है
GST Rate 2026 में फिलहाल कोई नई दर लागू नहीं हुई है, लेकिन आने वाले महीनों में बदलाव की संभावनाएं बनी हुई हैं। जीएसटी परिषद की बैठकों में 12% स्लैब को पूरी तरह खत्म करने पर चर्चा हो सकती है। इस स्लैब में आने वाली वस्तुओं को 5% या 18% में शिफ्ट किया जा सकता है, जिससे टैक्स सिस्टम और ज्यादा सरल बन जाएगा।
सरकार की कोशिश है कि अनाज, दाल, आटा और खाद्य तेल जैसी जरूरी चीजों पर 0% जीएसटी बना रहे। वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स, बीमा और घरेलू उपकरणों पर दरों को और आसान बनाने के सुझाव भी सामने आ रहे हैं। अगर ये बदलाव लागू होते हैं, तो आने वाले समय में GST आम आदमी के लिए और ज्यादा समझने योग्य और उपयोगी साबित हो सकता है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। जीएसटी दरें और नियम समय-समय पर सरकार और जीएसटी परिषद के फैसलों के अनुसार बदल सकते हैं। किसी भी वित्तीय या व्यावसायिक निर्णय से पहले आधिकारिक जीएसटी नोटिफिकेशन या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।









